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ज्ञानवापी पर अब जिला जज करेगा 30 तारीख को सुनवाई । ज्ञानवापी पर कोर्ट में चली 2 घण्टे बहस

ज्ञानवापी पर अब जिला जज करेगा 30 तारीख को सुनवाई । ज्ञानवापी पर कोर्ट में चली 2 घण्टे बहस हमने इस पोस्ट में ज्ञानवापी पर हुई 26 तारीख की सुनवाई, जिसमें हिंदू पक्ष व मुस्लिम पक्ष की सम्पूर्ण वार्ता बताई हैं।
ज्ञानवापी पर हुई 26 तारीख की सुनवाई
ज्ञानवापी का संपूर्ण विवाद

ज्ञानवापी पर हुई 26 तारीख की सुनवाई

आज वाराणसी के कोर्ट में ज्ञानवापी पर जज अजय कृष्ण विश्वेशा द्वारा दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया तथा इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनवाई की अगली 30 तारीख बताई है।

ज्ञानवापी सुनवाई विस्तार

आज सभी की निगाहें वाराणसी की जिला अदालत पर टिकी थी कि अदालत के जय जय कृष्ण विश्वेशा द्वारा क्या मामला आएगा तथा कोर्ट ने सबसे पहले मुस्लिम पक्ष की प्रार्थना को सुना तथा इसके साथ ही कमीशन की रिपोर्ट पर भी अदालत में आपत्ति आ सकती है।

दोनों वादी प्रतिवादी पक्षों में तीखी बहस

कोर्ट में वादिनी पक्ष से सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता हरी शंकर जैन सहित 30 अन्य लोग भी शामिल है। प्रतिवादी पक्ष से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी से अबे नाथ यादव ने पक्ष रखा है। वह कह रहे की यह वाद पोषणीय नहीं है।
सूत्रों के अनुसार सबसे पहले वादी पक्ष से विष्णू शंकर जैन ने अपनी दलीलें रखी है।
सबसे पहले ज्ञानवापी पर मिलेगी शिवलिंग को लेकर दोनों पक्षों ने अपना मत दिया है।

ज्ञानवापी शिवलिंग से हुई छेड़खानी

कोर्ट में हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि ज्ञानवापी का शिवलिंग, अभी तक मुस्लिम पक्ष के कब्जे में है तथा इस शिवलिंग के साथ छेड़खानी की गई है।

मुस्लिम पक्ष ने दिया, वाद खारिज करने का आवेदन

मुस्लिम पक्ष द्वारा आज कोर्ट में रूल 7 ऑर्डर 11 के तहत, कोर्ट यह आदेश देगा कि ज्ञानवापी का मामला सुनने योग्य है या नहीं तथा मुस्लिम पक्ष द्वारा इस बात को खारिज करने का आवेदन पहले ही दे दिया गया है।

इस वाद को खारिज करने का आवेदन दी प्लेस ऑफ वरशिप एक्ट 1991 के तहत अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा रूल 7 ऑर्डर 11 का हवाला दिया है।

ज्ञानवापी के तीन अन्य आवेदन पर होना है निर्णय

जिला जज की अदालत में अभी तीन और आवेदन पर निर्णय होना बाकी है जिसमें हिंदू पक्ष की ओर से शिवलिंग के नीचे की जगह तोड़कर वहां कार्यवाही करना, वजूखाने की मछलियों को संरक्षित करने की मांग तथा काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी के भोग, राग, श्रंगार और पूजा पाठ के अधिकार के लिए पक्षकार बनने के आवेदन पर निर्णय होगा।

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