हमने इस पोस्ट में बताया है कि दुनिया की 14 प्रतिशत आबादी को लाइम रोग हो सकता हैं, शोधकर्ता ने कहा है जिसमें लाइम रोग क्या होता है, किससे होता है तथा ठीक होने का तरीका व शोधकर्ताओं की सम्पूर्ण जानकारी बताई हैं।
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| लाइम रोग किससे होता है |
BMJ Global Health के 90 अध्ययनों के इस शोध से पता चला है कि दुनिया की करीब 14 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या लाइम रोग का शिकार हो सकती है।
येल स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के एक वरिष्ठ शौध वैज्ञानिक डॉ पीटर क्रॉस ने बताया कि यह दुनिया का पहला सबसे बड़ा सेरोप्रेवलेंस प्रोग्राम हो सकता हैं।
यह प्रोग्राम नये अध्ययन में शामिल नहीं है। Seroprevalence रक्त में एंटीबॉडी माप को बताता है।
शोधकर्ताओं के अध्ययनों में यह बताया गया कि बैक्टीरिया बॉरेलिया बर्गडोरफेरी, जिससे लाइन रोग होता है, इस बीमारी के लिए मनुष्यों में एंटीबॉडी कैसी होती है, इस अध्ययन में शामिल 158000 लोगों में से लगभग 23000 लोगों में ही इस बीमारी के लिए एंटीबॉडी थी, जो वर्तमान में इस बीमारी से संक्रमित थे या भूतकाल में हुए थे।
लाइम रोग की बीमारी सबसे ज्यादा यूरोप, उत्तरी अमेरिका में, आम टिक जनित बीमारी है।
एक नए अध्ययन से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि उत्तरी अमेरिका में इसके 9% निवासी संक्रमित है, तो वहीं इसके मध्य यूरोप में 21% निवासी संक्रमित है। यह क्रूज के शोध के समान है इसमें 2018 में न्यू इंग्लैंड में परीक्षण के 11% लोग बॉरेलिया बर्गडोरफेरी के एंटीबॉडी के लिए सकारात्मक थे।
अमेरिका में लाइम रोग के सबसे ज्यादा मामले पूर्वोत्तर व उत्तरी मध्य पश्चिम से है।
नए शोध विश्लेषण में ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, एशिया, केरेबियन तथा उत्तर और दक्षिण अमेरिका के प्रतिभागी शामिल हुए थे। कैरेबियन में ज्यादातर राष्ट्र द्वीप राष्ट्र है तथा यहां पर लाइम रोग से पीड़ित 2% लोगों की हिस्सेदारी है। क्रूज ने कहा कि यह ऐसे क्षेत्र है जहां रोग मौजूद नहीं है।
लेकिन धीरे-धीरे करके यह रोग फैलता गया तथा 2021 से 2010 तक के अध्ययन में यह 8% लोगों में लाइम रोग कि एंटीबॉडी थी तथा 2011 से 2021 तक के अध्ययन में यह 12% हो गई थी।
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों ने बताया कि अमेरिका मे लाइम रोग के मामलों में 1999 से 2019 तक 44% की वृद्धि हुई है।
नया विश्लेषण यह बताता है कि हिरण के टिक्स जो लाइम रोग फैलाते हैं, वह गर्म और आर्द्र जलवायु में रहते हैं।
बढ़ते तापमान के कारण लंबी गर्मी और कम सर्दियां हो गई है, जिसके कारण टिक और अधिक प्रचुर और व्यापक हो गए हैं। मनुष्य भी वनों का कटाव करके वहां पर अतिक्रमण कर रहे हैं जहां पर टिक रहते हैं।
क्रूस ने यह भी कहा है कि हिरणों की आबादी बढ़ने के कारण टिको को खिलाने और उनके प्रजनन करने के अवसर बढ़ गए हैं और उसने कहा कि जहां भी हिरण होते हैं टिको की संख्या बढ़ जाती है।
लाइम रोग के लक्षण
CDC के अनुसार यह बताया गया है कि 70 से 80% लोग जो लाइम रोग का अनुबंध करते हैं, टिक काटने की जगह पर बुल आई रैश विकसित करते हैं।
टिक के काटने से बने दाने मुख्य रूप से 3 से 30 दिन बाद में दिखाई पड़ते हैं, यह दाने 12 इंच तक जुड़े हो सकते हैं।
यह स्पर्श करने के लिए गर्म महसूस कर सकता है परंतु जहां खुजली व चोट नहीं करता है।
टिक के काटने के तुरंत बाद ही बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है, यह उन लोगों पर भी असर करता है जिन्हें रैश नहीं होता है।
यदि कोई अधिक गंभीर मामला है तो लोगों को टिक द्वारा काटने के तुरंत बाद ही कुछ दिनों में तेज सिर दर्द, दिल की धड़कन, चक्कर आना, तंत्रिका दर्द, गर्दन में अकड़न, सांस की तकलीफ, गंठिया, चेहरे के एक तरफ कमजोरिया, पक्षाघात हो सकता है।
अध्ययन की सहायता से यह पता लगा है कि बॉरेलिया बर्गडोरफेरी बैक्टीरिया कि एंटीबॉडी कम से कम 16 महीने तक और दूसरे के अनुसार 10 से 20 साल तक बनी रह सकती है।
14% परिचित लोगों को लाइम रोग एक उच्च संक्रमण रख सकता है।

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