Motivational story of Aruna । upsc motivation story हमने इस पोस्ट में यूपीसी 2021 में हुए अरुणा जीके सिलेक्शन तथा उनके जीवन व उनकी मेहनत तथा आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उठाई मुश्किलों के बारे में बताया है।
UPSC Motivation 2021
यूपीएससी की परीक्षा 2021 का रिजल्ट जब जारी हुआ, तो उसमें लड़कियों ने काफी बाजी मारी है तथा जब हम उनकी कहानी सुनते हैं तो वह एक प्रेरणादायक तथा उत्साह से भरने वाली होती है, इसी बीच हमने अरुणा के बारे में जाना है जिन्होंने कड़ी मेहनत करके यूपीएससी के 2021 के रिजल्ट में अपना नाम लिखवाया है।
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| यूपीएससी क्लीयर करने वाली अरूणा |
UPSC Motivation story
देश में आए UPSC के रिजल्ट में एक ऐसा परिवर्तन आया है, जो पहले कभी नहीं हुआ है इस बार यूपी में टॉप 3 तक लड़कियों का कब्जा रहा है तथा यह एक महिला सशक्तिकरण की ओर इशारा कर रहा है।
इस बार यूपीएससी में कुछ खास बातें भी पता चली, इस परीक्षा में इस बार किसी का कई बार एग्जाम देने पर सिलेक्शन नहीं हुआ तो किसी का बहुत बार देने पर इस बार एक्जाम हो गया है।
UPSC Aruna story
आज हम इस पोस्ट में अरुणा के बारे में जानेंगे, जो कर्नाटक की रहने वाली है जिनके पिता की 5 बेटी बेटा थे तथा वह अपने इन बच्चों को पढ़ाने के लिए कर्ज लिया था तथा वह किसान थे, लेकिन कर्ज चुका ना पाए, तो आत्महत्या कर दी थी तथा जिनकी बेटी आज पढ़कर छठी बार में यूपीएससी का एग्जाम क्रैक करती है तथा कई लोगों की प्रेरणादायक बन जाती है, इन्होंने यूपीएससी 2021 में 308 वी रैंक हासिल की है।
कर्ज से परेशान पिता ने की आत्महत्या
अरुणा कर्नाटक के बैकवर्ड क्लास सोसाइटी से आती है तथा अरुणा अपने पांच भाई बहनों में से एक है, इनके पिता एक किसान थे तथा वह खेती से ही अपना घर चलाते थे, अरुणा जी के पिता का सपना था कि उनके बच्चे पढ़ लिख कर एक काबिल इंसान बने तथा अपने नाम को प्रसिद्ध करें, इसीलिए उनके पिता ने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बैंक से कर्ज लिया तथा वह काफी समय तक ना चुकाने के कारण बढ़ता गया और बैंक वाले भी फिर उनके ऊपर दबाव बढ़ाने लगे और मकान की नीलामी की चेतावनी देने लगे तथा इस डर से उन्होंने 2009 में परेशान होकर आत्महत्या कर दी, जिस वक्त यह घटना हुई थी उस वक्त अरुणा अपनी इंजीनियरिंग कर रही थी।
5 बार UPSC परीक्षा में फेल
अपने पिता की मृत्यु का असर अरुणा जी पर गहरा पड़ा तथा अरुणा जी ने अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए यूपीएससी की तैयारी करने को सोचा तथा इसके बाद उन्होंने 2014 से लगातार यूपीएससी की परीक्षा देती रही थी, लेकिन परीक्षा को क्लियर नहीं कर पाई।
बड़ी बात यह थी, कि कर्नाटक समेत देशभर में ओबीसी का कोटा लागू है लेकिन फिर भी वह पढ़ती रही उन्होंने आरक्षण की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया तथा हर बार ही अनारक्षित वर्ग के रूप में ही परीक्षा दी।
छठी बार में क्रय कर लिया UPSC एग्जाम
अपने हर प्रयास की तरह ही अरुणा ने यूपीएससी का छठा एग्जाम दिया तथा इस बार उनकी मेहनत निखर कर बाहर आई और 2021 के यूपीएससी लिस्ट में उनका नाम आया, जिसके साथ ही उन्होंने 308 वी रैंक हासिल कर ली तथा उन्हें IPS वर्ग मिलना लगभग तय माना जा रहा है।
इसके साथ ही वे अपने स्वर्गीय पिता को याद करते हुए कहा कि इस उपलब्धि का श्रेय मैं अपने पिता को देती हूं तथा मेरी इस उपलब्धि में मां-बाप ने जितना किया है, उतना कोई नहीं कर सकता है।
खुद की भी कोचिंग अकैडमी
अरुणा जी ने कहा कि उनकी एक बेंगलुरु में कोचिंग भी है, जिसका नाम अरुणा एकेडमी है तथा वहां पर अरुणा जी ग्रामीण बच्चों को यूपी में बैठने के लिए प्रोत्साहित करती हैं तथा उन्हें पढ़ाती भी है।
अरुणा कहती है जिस प्रकार उनके पिता आर्थिक रूप से परेशान होकर आत्महत्या की है, उस प्रकार अन्य कोई नहीं करें, जिसके लिए अरुणा जी नौकरी में आने के बाद किसानों को समझाने तथा नए आर्थिक रास्ते को बताने का काम करेगी।


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